पाकिस्तानी पीएम शहबाज़ शरीफ और ईरानी आंतरिक मंत्री एस्कंदर मोमेनी की इस मुलाकात का असली मतलब क्या है

पाकिस्तानी पीएम शहबाज़ शरीफ और ईरानी आंतरिक मंत्री एस्कंदर मोमेनी की इस मुलाकात का असली मतलब क्या है

पश्चिम एशिया में युद्ध की आग भड़की हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच सीधे हमले हो रहे हैं। इसी भीषण तनाव के बीच इस्लामाबाद से एक बड़ी खबर सामने आई है। पाकिस्तानी पीएम शहबाज़ शरीफ ने की ईरानी आंतरिक मंत्री एस्कंदर मोमेनी से मुलाकात, सभी पक्षों से संयम बरतने की कही बात। यह केवल एक औपचारिक राजनयिक बैठक नहीं है। इसके पीछे छिपी है एक बड़ी वैश्विक मध्यस्थता की कहानी जो इस वक्त दुनिया को महायुद्ध की खाई में गिरने से बचा सकती है।

क्या पाकिस्तान इस तनाव को शांत कर पाएगा? यह एक बड़ा सवाल है। दरअसल, ईरानी आंतरिक मंत्री एस्कंदर मोमेनी एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ अचानक पाकिस्तान दौरे पर पहुंचे हैं। उन्होंने इस्लामाबाद में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और रावलपिंडी में पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से अलग-अलग मुलाकातें की हैं। इस बातचीत का मुख्य एजेंडा सिर्फ सीमा सुरक्षा या व्यापार नहीं था, बल्कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को रोकना था। Also making news in this space: Why Trump Keeps Losing The Battle Over The Federal Voter List.

इस्लामाबाद समझौते को बचाने की आखिरी कोशिश

यह समझना जरूरी है कि यह मुलाकात इस वक्त क्यों हो रही है। पिछले महीने ही पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच 'इस्लामाबाद समझौता' (Islamabad MoU) हुआ था। यह 14 बिंदुओं का एक अंतरिम शांति समझौता था जिसका मकसद दोनों देशों के बीच जारी जंग को खत्म करना था।

लेकिन हाल के दिनों में हालात फिर बिगड़ गए हैं। अमेरिका लगातार ईरान पर बमबारी कर रहा है और ईरान भी खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर पलटवार कर रहा है। ऐसे में यह समझौता पूरी तरह टूटने की कगार पर है। पीएम शहबाज शरीफ इसी समझौते को बचाना चाहते हैं। उन्होंने ईरानी मंत्री के सामने साफ शब्दों में चिंता जताई कि अगर दोनों पक्षों ने संयम नहीं बरता, तो पूरा क्षेत्र पूरी तरह तबाह हो जाएगा। More details regarding the matter are explored by USA Today.

सेना प्रमुख आसिम मुनीर से मुलाकात और सुरक्षा के मायने

एस्कंदर मोमेनी ने पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय (GHQ) जाकर सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से भी लंबी बातचीत की। पाकिस्तान और ईरान के बीच लगभग 900 किलोमीटर लंबी सीमा साझा होती है। हाल के दिनों में सीमा सुरक्षा को लेकर दोनों देशों के बीच कड़वाहट भी देखी गई थी।

इस बैठक में दोनों देशों ने सीमा प्रबंधन को मजबूत करने पर सहमति जताई। ईरानी पक्ष ने खुलकर इस बात की तारीफ की कि पाकिस्तान दोनों महाशक्तियों के बीच एक निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तान खुद को एक 'ईमानदार और सच्चे मध्यस्थ' के रूप में पेश कर रहा है, क्योंकि खाड़ी में अशांति का सीधा असर उसकी खुद की कमजोर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

केवल युद्ध नहीं व्यापार बढ़ाना भी है मजबूरी

तनाव के बीच दोनों देश अपने आर्थिक रिश्तों को भी सुधारना चाहते हैं। वर्तमान में पाकिस्तान और ईरान के बीच सालाना द्विपक्षीय व्यापार करीब 3 अरब डॉलर का है। एस्कंदर मोमेनी ने साफ किया कि वे इसे बढ़ाकर 10 अरब डॉलर तक ले जाना चाहते हैं। यह योजना करीब एक महीने पहले ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के पाकिस्तान दौरे के दौरान बनी थी, और अब इसे जमीन पर उतारने की कोशिश की जा रही है।

पाकिस्तान के लिए ईरान से सस्ती ऊर्जा और व्यापारिक रास्ते मिलना बेहद जरूरी है, खासकर तब जब वह खुद भारी वित्तीय संकट से गुजर रहा है।

आगे क्या होगा

यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या पाकिस्तान की यह कोशिश रंग लाती है। पर्दे के पीछे से बातचीत जारी है। अमेरिकी हमले और ईरानी जवाबी कार्रवाई के बीच पाकिस्तान दोनों को बातचीत की मेज पर बनाए रखने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है।

क्षेत्रीय शांति को बनाए रखने के लिए अब तुरंत इन दो कदमों पर काम करना होगा:

  1. अमेरिका और ईरान दोनों को इस्लामाबाद समझौते के नियमों का तुरंत पालन करना शुरू करना होगा।
  2. पाकिस्तान और ईरान को अपनी साझा सीमा पर सुरक्षा ग्रिड को मजबूत करना होगा ताकि कोई तीसरा तत्व इस तनाव का फायदा न उठा सके।
NS

Nathan Stewart

Nathan Stewart is known for uncovering stories others miss, combining investigative skills with a knack for accessible, compelling writing.